रांची स्थित रिम्स के जेनेटिक्स एवं जीनोमिक्स विभाग ने प्रसवपूर्व आनुवांशिक जांच के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब गर्भ में पल रहे शिशु में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्राफी और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी जैसी गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी।