प्रभात पटनायक नव-उदारवाद के प्रवक्ताओं की एक बात बहुत खास होती है। जब भी नव-उदारवाद पर अमल के चलते कोई अर्थव्यवस्था संकट में फंस जाती है, वह एक ही रामबाण उपचार बताते हैं– और ज्यादा नव-उदारवादी ‘सुधार’ किए जाएं। यह सबसे स्वत:स्पष्ट रूप में सोवियत संघ के पराभव के बाद रूस में देखने को मिला [...]