जीन एडिटिंग और CRISPR जैसी तकनीकों ने जन्म से पहले जेनेटिक बीमारियों को रोकने की उम्मीद जगाई है. हालांकि, बच्चे की हाईट, आंखों का रंग या बुद्धिमत्ता तय करना अभी वैज्ञानिक रूप से संभव नहीं है. फिर भी इस तकनीक को लेकर दुनियाभर में बहस और रिसर्च लगातार जारी है.