जयपुर की 34 वर्षीया सुधा (बदला हुआ नाम) ने एचआईवी पॉजिटिव के साथ ही उम्र बिताई। यह संक्रमण उसे माता-पिता से मिला। बचपन से दवाइयां, अस्पताल और जांच उसकी जिंदगी का हिस्सा रहे। परिवार ने उसे पढ़ाया-लिखाया, लेकिन शादी की बात आते ही बीमारी आड़े आती थी। वो कहती है- लगता था कि जिंदगी अकेलेपन में गुजरेगी, कहीं कोई उम्मीद नजर नहीं आती थी। उधर ज्वैलरी का काम करने वाला अजय 19 साल की उम्र में एचआईवी संक्रमित हुए थे। अजय के मुताबिक- लोग एड्स रोगी को मरीज से ज्यादा खतरा समझने लगते हैं। सब दूर हो जाते हैं। लगा