भारत का विदेशी कर्ज-GDP अनुपात बढ़कर 20.8 फीसदी पहुंच गया है, जो एक साल पहले 19.8 फीसदी था. यानी आर्थिक विकास के साथ-साथ विदेशी उधारी का आकार भी बढ़ रहा है.