आजादी के समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी देश की बढ़ती आबादी को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना. विभाजन के बाद कई उपजाऊ कृषि क्षेत्र अलग हो गए थे और खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर थी. 1950-51 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 50.8 मिलियन टन था, जो जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं था. इसी कारण भारत को अमेरिका से पीएल-480 योजना के तहत गेहूं और अन्य खाद्यान्न आयात करने पड़ते थे. 1960 के दशक में सूखे और खाद्यान्न संकट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया. इसके बाद हरित क्रांति