तमिल सिनेमा में ट्रांसजेंडर किरदारों की कहानियां पहले भी दिखाई गई हैं, लेकिन उनमें अक्सर एक बात समान रही है दुख और संघर्ष. ट्रांस किरदारों को अस्वीकृति, भेदभाव, हिंसा और सामाजिक अकेलेपन से गुजरते हुए दिखाया जाता रहा है. डोरोथी इस कहानी को उलट देती है.