आई फ्लोटर्स छोटे-छोटे धब्बे, धागे, जाले जैसे निशान की तरह दिखाई देते हैं, जो आंखों के सामने तैरती हुई महसूस होती हैं. खासतौर पर जब कोई व्यक्ति सफेद या चमकदार बैकग्राउंड को देखता है, तब ये ज्यादा नजर आते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, आंख के अंदर एक जेली जैसा पदार्थ होता है, जिसे विट्रियस (Vitreous) कहा जाता है. यह आंख के लेंस और रेटिना के बीच मौजूद रहता है. जब यह विट्रियस रेटिना से अलग होने लगता है, तो ऐसी स्थिति बन सकती है जिसे पोस्टेरियर विट्रियस डिटैचमेंट कहा जाता है. इसी प्रक्रिया के दौरान फ्लोट