RBI ने क्रेडिट डेरिवेटिव्स बाजार को मजबूत बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिनसे बैंक, वित्तीय संस्थान और बड़ी कंपनियां क्रेडिट रिस्क का बेहतर मैनेजमेंट कर सकेंगी.नए नियमों के तहत गैर-रिटेल भारतीय निवेशकों को CDS और TRS जैसे साधनों के इस्तेमाल में ज्यादा छूट दी गई है, जबकि नॉन-रेजिडेंशियल निवेशक इन्हें केवल हेजिंग के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे. RBI का मानना है कि इससे कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और कंपनियों के लिए फंड जुटाना आसान होगा.